पहले प्रधानमंत्री की आलोचना करना आसान था, लेकिन अब “राष्ट्र-विरोधी” का तमगा दे दिया जाता है: जावेद अख्तर

Posted on 08 Jan 2017 by Admin     
पहले प्रधानमंत्री की आलोचना करना आसान था, लेकिन अब “राष्ट्र-विरोधी” का तमगा दे दिया जाता है: जावेद अख्तर

दिग्गज लेखक जावेद अख्तर ने एक्सप्रेस ग्रुप से खास बातचीत में राष्ट्रवाद की राजनीति और असहिष्णुता पर अपनी राय रखी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की आलोचना करने पर लोगों को राष्ट्र-विरोधी का तमगा दिए जाने की घटनाओं को बढ़ती असहिष्णुता बताया। उन्होंने कहा “पहले प्रधानमंत्री को लेकर मजाक करना आसान था लेकिन आज के समय में अगर आप ऐसा करते हैं तो आप पर राष्ट्र-विरोधी होने का तमगा लगा दिया जाता है।” जावेद अख्तर ने राजनीति से लेकर धर्म जैसे मुद्दों पर भी बातचीत की। अख्तर ने धर्म पर भी अपनी राय दी।

उन्होंने कहा, “विश्वास और आस्था अलग-अलग चीजें हैं, वहीं विश्वास को साबित कर पाना मुश्किल है, लेकिन यह किसी का निजी मामला होता है। ऐसे में धर्म का होना जरूरी है लेकिन उसे ऐसे रखना चाहिए जैसे किसी संग्रहालय में रखा जाता हो।”

वहीं असहिष्णुता के मुद्दे पर भी उन्होंने कहा, “ऐसा नहीं है कि इस समय हालत बहुत खराब है या सब कुछ गलत ही हो रहा है, लेकिन उन्होंने कहा कि अगर आज फिल्म जाने भी दो यारों की तरह महाभारत का कोई सीकुअल शूट किया जाए तो शायद उसके खिलाफ धरना शुरू हो जाए।” उन्होंने आगे कहा कि पहले प्रधानमंत्री को लेकर मजाक करना आम बात होती थी, लेकिन आज के समय में अगर आप ऐसा करते हैं तो आप पर राष्ट्र-विरोधी होने का तमगा लगा दिया जाता है।



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