पहलू खान के परिवार से मिलने पहुँचे इमरान कहा दुनियाँ को बताऊंगा पहलू पर हुए ज़ुल्म की दास्तान।

Posted on 12 May 2017 by Admin     
पहलू खान के परिवार से मिलने पहुँचे इमरान कहा दुनियाँ को बताऊंगा पहलू पर हुए ज़ुल्म की दास्तान।

करीब अस्सी बरस की एक बुढ़ी माँ जिसकी दोनों आँखें नहीं है. बिना सहारे के वो चल नहीं सकती. और जिन आँखों से वो दुनियाँ को देखती और महसूस करती थी. उन आँखों को उस बुढ़ापे के सहारे को दिल और दिमाग से अपाहिज चंद हैवानों ने हमेशा हमेशा के लिए उससे जूदा कर दिया. इस बूढ़ी माँ के चेहरे पर में अपने बेटे पहलु खान को खोने का दर्द देखकर बरबस ही रोना आ जाता है. पहलु खान की मौत के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है. और बड़ी बात तो ये है कि राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आने के बाद भी ना तो किसी सरकारी अधिकारी की कान में जूँ रेंगी और ना ही रात दिन मुसलमान मुसलमान चीख़ कर अपनी राजनैतिक दुकान चलाने वाले मुस्लिम नेता अपनी नींद से जागे. किसी तरह की मदद तो छोड़िए किसी ने पहलू खान के परिवार से मिलने तक की ज़हमत नहीं उठाई. और उठाते भी तो क्यों उनकी राजनीति का दायरा आजकल सिर्फ चुनाव लड़ने तक ही सीमित जो रह गया है।

खैर अल्लाह ने जिसकी मदद करनी होती है तो फिर वो कहीं ना कहीं से किसी ना किसी से काम ले ही लेता है. और हमें फ़ख़्र होना चाहिए कि पिछली कई बार की तरह इस बार भी परवरदिगार ने इस नेक काम के लिए इमरान को चुना. इमरान ने ऐलान किया की वो मरहूम पहलू खान की अम्मी का सारी ज़िंदगी ख़र्च उठाएंगे और बहोत जल्द ही उनके परिवार से मिलकर उनसे जो बन पड़ेगा उनकी मदद करेंगे. इमरान के इस फैसले को लोगों ने दिल खोलकर सराहा और उनसे खुद भी इस मुहिम का हिस्सा बनकर पीड़ित परिवार की मदद की इच्छा जताई. तब फिर इमरान ने पहलू खान के परिवार का अकाउंट नंबर सार्वजनिक करते हुए लोगों से मदद की अपील की. इमरान की एक आवाज़ पर उनके चाहने वालों में पहलू के परिवार की मदद की होड़ सी मच गई. देश के अलग अलग हिस्सों के अलावा खाड़ी देशों से भी लोगों ने इमरान की इस मुहिम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और कतरा कतरा जुड़ते जुड़ते एक सम्मानजनक राशि ससम्मान पहलू खान के परिवार तक पहुँच गई।

और फिर वादे मुताबिक़ इमरान खुद उस परिवार से मिलने के लिए निकल पड़े और खुशी की बात ये थी की इमरान अब अकेले नहीं थे उनके साथ उनके दोस्तों साथियों और चाहने वालों का पूरा काफ़िला था जो इमरान की एक आवाज़ पर देश के अलग अलग हिस्सों से आकर उनकी इस मुहिम का हिस्सा बनने उनके साथ हो चला था. इमरान के साथ उनके लाखों चाहने वालों की मोहब्बतें थी जो इस नेक काम में उनका हौसला बनकर उनके साथ थी. इमरान के साथ हज़ारों हज़ार माँओं और बहनों की दुआएँ थी जो उनका रास्ता आसान कर रही थी. इमरान के सर पर लाखों बुज़ुर्गों का हाथ था जो ये कह रहे थे बेटा जा अल्लाह तेरी हिफाज़त करेगा.

इमरान अपने साथियों सहित जिस वक्त पहलू खान की बूढ़ी से मिलने पहुँचे तो वो इमरान से लिपट कर रोने लगी मंज़र ऐसा था कि इमरान भी अपने आँसू नहीं रोक पाए और फफक कर रो पड़े साथ गए लोगों की आँखो में भी आँसू थे थोड़ी देर के लिए का पूरा माहौल गमगीन हो गया. इमरान और उनके दोस्तों ने मिलकर करीब ढाई लाख रुपए की आर्थिक मदद ( बैंक अकाउंट में डलवाई गई राशि को छोड़कर) पीड़ित परिवार को मुहैया कराई (जिसकी उस परिवार को शख़्त ज़रूरत भी थी) और आगे भी जो बन पड़ेगी मदद का भरोसा दिलाया. साथ ही साथ हर महीने 5000 रुपए की आर्थिक मदद के अपने वादे को भी दोहराया. और उन्होंने पीड़ित परिवार से ये वादा भी किया की वो पूरी दुनियाँ को पहलू खान के साथ हुए ज़ुल्म की दास्तान बताएँगे।

आप सबने देखा होगा कुछ लोग इमरान के मदद करने के ऐलान के बाद से ही फेसबुक पर डींगे हाँक रहे थे की उस परिवार को आर्थिक मदद की जरूरत नहीं है, ऐसा है तो वैसा है, ये है तो वो है, वगैरह वगैरह। दोस्तों ये वो लोग हैं जिनका काम है फेसबुक पर सिर्फ और सिर्फ लोगों के हौसले पस्त करने की कोशिशें करना. लोगों को बिलावजह टार्गेट करके उन्हें ट्रोल करना. अच्छी भली बातों में बुराई की गुंजाइश ढूंढना. कोई कुछ अच्छा काम करने जा रहा है तो उसकी राह में रोड़े खड़े करना. और ज़रा सी बातों का स्क्रीनशॉट लगाकर अपने आपको बहोत बड़ा तीसमारखाँ समझना. हालाँकि वो भूल जाते कि वो जिस मकसद से ये सब कर रहे होते हैं वो चंद फेसबुकिया बकैतों को छोड़कर सबकी समझ आ रहा होता है. दोस्तों ऐसे लोगों से खुद को दूर रखने जरूरत है वरना ये यूँहीं अपनी दुकान चमकाने के लिए हर रोज़ किसी ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले शख़्स का मज़ाक बनाते रहेंगे. उनके आँसुओं का तमाशा बनाते रहेंगे. उनके निःस्वार्थ कामों में अपनी स्वार्थी आँखों से स्वार्थ की गुंजाइश निकालकर आपको बरगलाते रहेगें। यहाँ तक कि इन अच्छे लोगों का साथ देने वाले और समर्थन करने वालों तक का मखौल उड़ाने से भी नहीं चूकेंगे। पर हमें होशियार रहना है ताकि हम किसी के बहकावे में आकर इस तरह के लोगों के रास्ते का फूल ना सही तो कम से कम काँटा भी ना बने। हमें होशियारी से काम लेना है ताकि हम जाने अनजाने उनकी इस नापाक कोशिशों का हिस्सा ना बन जाएं।

यहाँ एक बात और स्पष्ट कर देना चाहता हूँ. इमरान को नेता नहीं है. इन सब कामों में उनका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी तरह का स्वार्थ नहीं जुड़ा हुआ है. और ना ही ये सब चीज़ें उनके कार्यक्षेत्र का हिस्सा है. लेकिन फिर भी इन सबसे ऊपर उठकर वो अपनी जिम्मेदारी समझते हुए मानवीय आधार पर अपने-आप को हर उस जगह शामिल करने की कोशिश करते हैं जहाँ उन्हें लगता है कि उनको होना चाहिए. ये अपने आप में एक बहोत बड़ी बात है. जिसके लिए इमरान की हर स्तर पर प्रशंसा होनी चाहिए. उनकी हौसला अफज़ाई की जानी चाहिए ताकि उनका मनोबल और ऊंचा होता रहे!

एक बार से इस नेक काम के लिए इमरान भाई सहित उनके साथ गए साथियों भाई आशु मलिक, जहाँगीर भाई, ज़ाहिद भाई, नवेद चौधरी भाई, जुनैद भाई, मक़सूद भाई, शमीम भाई और जितने भी साथी उनके साथ मेवात गए थे सभी का तहेदिल से शूक्रिया!

Islahuddin Ansari

 



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