2019 आम चुनाव। राहुल गाँधी के राजनैतिक जीवन की अग्नी परीक्षा।

Posted on 21 Apr 2017 by Admin     
2019 आम चुनाव। राहुल गाँधी के राजनैतिक जीवन की अग्नी परीक्षा।
राहुल गाँधी और काँग्रेस के पास अब खोने के लिए ज्यादा कुछ नहीं बचा है। उनके पास जो कुछ भी था लगभग सब गंवा चुके है। अब उनके पास मौका है तो सिर्फ और सिर्फ पाने का। और उसके लिए जरूरी हो गया है की वो रक्षात्मक खेल ना खेल कर आक्रामक खेल खेले। देश की जनता के पास हाल फिलहाल काँग्रेस के अलावा राष्ट्रीय स्तर को दूसरा विकल्प नहीं है जिसका देश भर में आधार हो। बस जरूरत है काँग्रेस किस तरह अपने इस आधार का इस्तेमाल मजबूत जनाधार जुटाने के लिए करती है। 
 
देश की जनता का लोकतांत्रिक सूझबूझ में अब भी इतनी सजग है कि वो सत्ता ना सही काँग्रेस को एक मजबूत विपक्ष का दर्जा देने के लिए हमेशा तैयार है। पर उसके लिए जरूरी है कि काँग्रेस अपने आप को बदले। और इसकी जिम्मेदारी राहुल को अपने कांधे पर लेनी होगी उन्हें अपना दायरा तोड़कर आगे आना होगा। काँग्रेस सारे संगठन जो अलग अलग पटरी पर अलग अलग दिशाओं में दौड़कर उर्जा का नाश कर रहे हैं उन सबको एक पटरी पर लाना होगा। उन्हें कार्यकर्ताओं को विश्वास जीतना होगा। उन्हें देश के मतदाता को ये विश्वास दिलाना होगा कि नहीं काँग्रेस अब भी वही काँग्रेस है जो इंदिरा जी और राजीव जी के समय पर थी। 
 
काँग्रेस के पतन का एक प्रमुख कारण काँग्रेस में भीतर तक व्याप्त गुटबाजी है। राहुल को सबसे पहले इसे खत्म करना होगा। हर आंदोलन हर प्रदर्शन में कमलनाथ जिंदाबाद दिग्विजय सिंह जिंदाबाद अरुण यादव जिंदाबाद जैसी सिर फुटव्वल वाली स्थित को समाप्त करने के लिए काँग्रेस कार्यकर्ताओ को सख़्ती हे रोकना होगा उनके हाथ से सारे झंडे वापस लेकर उन्हें काँग्रेस पार्टी का झंडा थामने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। काँग्रेस से सारे गुट ख़त्म करके सिर्फ राहुल गूट को तरजीह देनी होगी।
 
लंबे समय से काँग्रेस की सेवा कर रहे बुज़ुर्ग नेताओं की जगह नये चेहरों और यूवा विचारधारा को सामने लाकर काँग्रेस को इस संकट के दौर से बाहर निकाला जा सकता है। विरोधियों ने जिस रणनीति के तहत आम जनमानस के मन में काँग्रेस की नकारात्मक छवि बनाई है उसी तरह की रणनीति के तहत काँग्रेस को जनता के बीच अपनी खोई हुई सकारात्मक छवि को वापस पाना होगा। संगठनात्मक ढांचे को पूरी तरह से बदलकर उसमें ऊर्जावान चेहरों मौका देते हुए एक नई काँग्रेस को गढ़कर जनता की अदालत में फिर से जाना होगा। दलबदलु किस्म के नेताओं को चिन्हित कर उन्हें पार्टी से बाहर निकालकर विश्वासपात्र चेहरों काँग्रेस के बैनर पोस्टरों पर जगह देनी होगी। 
 
राहुल के पास समय कम है 2019 की सफलता या विफलता राजनीति में उनके भविष्य की दशा और दिशा तय करेगा। 2019 का चुनाव उनके राजनैतिक जीवन का सबसे बड़ा इम्तिहान हैं। अगर किसी कारणवश वो इस इम्तिहान में अपना प्रदर्शन पहले से बेहतर नही कर पाए तो काँग्रेस के लिए बड़ी मुश्किल परिस्थितियाँ उत्पन्न हो जाएँगी। अब पूरा दारोमदार राहुल पर हैं कि वो किस तरह से 2019 की अग्नि परीक्षा के लिए खूद को तैयार करते हैं। राहुल प्रतिभाशाली हैं बस जरूरत है इस प्रतिभा पर छाए काले बादलों को छांटकर लक्ष्य प्राप्ति के लिए गंभीर प्रयास करने के। और एक सबसे अहम बात अब उन्हें कुर्ता पैजामा की थोपी हुई छवि से बाहर निकलकर स्टाइलिश नेता की छवि अपनानी होगी देश का यूवा राहुल को कुर्ते के साथ साथ जीन्स टीशर्ट और चश्मे में भी देखना चाहता है। एक स्टाइलिश और गंभीर राजनेता।
 
By: Islahuddin Ansari
 


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