सोशल मीडिया। आलोचना की आड़ में मर्यादाओं की सीमा लांघते तथाकथित आलोचक।

Posted on 09 Jan 2017 by Admin     
सोशल मीडिया। आलोचना की आड़ में मर्यादाओं की सीमा लांघते तथाकथित आलोचक।

मोहम्मद शामी ने अपनी बीवी की तस्वीर सोशल साइट्स पर क्यों शेयर की? मोहम्मद कैफ ने सूर्य नमस्कार क्यों किया? करीना और सैफ ने अपने बेटे का नाम तैमूर क्यों रखा? राहुल गाँधी छुट्टी पर क्यों गये? इमरान प्रतापगढ़ी नजीब पर नज़्म कहते हुए क्यों रोये? टीना डाबी ने अतहर अब्बास से सगाई क्यों की? फरहा खान के बच्चों का मज़हब क्या है? ये वो फिजूल के सवाल है जो पिछले दिनो सोशल मीडिया पर खूब उछाले गये। जिन पर खूब चटखारे लेकर चर्चा की गई। सोशल साइट्स के तथाकथित वीरों ने उपरोक्त प्रसिद्ध हस्तियों जुड़ी निजी बातो के लेकर उनकी निजी जिंदगी में घुसपैठ करने की शर्मनाक़ कोशिश को अंजाम दिया।

बेगानी शादी में अब्दुल्लाह दीवाना वाली कहावत को चरितार्थ करती इन सोशल मीडिया यूजर्स की हरकतों ने बार बार मर्यादाओं की सीमा लांघकर भाषा के निम्नतम स्तर को छुआ। नामकरण, दिनचर्या, रहन सहन, पसंद-नापसंद एहसास जैसी निजी बातों को खुले मंच पर चर्चा का विषय बनाकर अपनी ओछी मानसिकता से लोगो को अवगत कराया। आज के समय में जबकि देश लगातार आधुनिकीकरण की ओर बढ़ रहा है। हर तरफ तकनीक का बोल-बाला है। हम हर रोज़ नये नये बदलाव को देख रहे हैं उसे अपनाने की कोशिश कर रहे हैं। हम पढ़ लिखकर एक बेहतर समाज की परिकल्पना को अंजाम दे रहे हैं। एक बेहतर सोच के साथ एक बेहतरीन वातावरण विकसित करने की बाते कर रहे हैं। हमारे यूवा एक नया हिंदुस्तान बनाने की बात कर रहे हैं जहाँ नफरतो के लिए जगह ना हो जहाँ हर तरफ मोहब्बत का बोल बाला हो।

अच्छे लोगो की कोशिशों से एक खुबसूरत से हिंदुस्तान बनाने की बाते हो रही है। वहीं इन सब के उलट कुछ लोग सोशल साइट्स पर दिन रात ऐसे कामों मे लगे हुए हैं जिनका एक अच्छे इंसान से एक अच्छे समाज से एक अच्छे माहौल से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं है। सोशल मीडिया पर उनकी मौजूदगी का असल मकसद ही बिलावजह की बातों को हवा देना है। वो बेताब रहते है कि कब किसी तरीके का कोई फिजूल का गर्मा-गर्म मुद्दा मिल जाये और ये अपने स्मार्टफोन की स्क्रीन पर अपनी उंगलियाँ घिसना शुरू करे। वो इंतज़ार में रहते हैं कि कब कोई सेलिब्रिटी कोई कोई ऐसा काम करे जिसका ये तथाकथित लोग तिल का ताड़ बनाकर अपनी खुजली मिटा सके। उनके पढ़ लिखकर बड़े होने का हासिल ये हुआ की वो सोशल साइट्स के इस मकड़जाल में फंसकर खुद को गलत बातों में गलत चीजों मे खर्च कर रहे है।

हम जिस देश जिस और जिस समाज का हिस्सा है उसने कभी भी इस तरह की ओछी बातो को इस तरह की छोटी सोच को सही नही ठहराया है। बड़ो का सम्मान। छोटो को प्यार।औरत की मर्यादा। धर्म के प्रति आदर। दूसरो के आत्मसम्मान का ख्याल रखना। उनके भावनाओं की कद्र करना। ये सब बाते हमें बचपन से ही सिखाई गई है। और हमे संस्कारित और शिक्षित बनाने के लिए हमारे माँ बाप ने हमारे परिवार ने कोई कसर नही छोड़ी। फिर ना जाने कहाँ से हमारे अंदर ने इस घृणित मानसिकता ने आकार ले लिया जो हमे इस तरह की ओछी हरकतों के लिए प्रेरित करती है। किसी की निजी जीवन निजी अधिकार क्षेत्र और निजी बातो पर उंगली उठाने का साहस हम कैसे कर बैठते है ये समझ से परे है। हम कैसे भूल जाते है कि सामने वाला व्यक्ति जिस पर हम सोशल साइट्स पर बैठकर अनर्गल बाते मढ़ रहे है बेमतलब के सवाल पूछ रहे है उसने हमे हर बार. बार बार गौरवान्वित होने के मौके दिए है। वो देश के लाखों लोगो को कुछ बनने के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित करते है। वो हमारे मुद्दों के लिए लड़ने वाले लोग है वो देश का नाम ऊँचा करने वाले लोग है। फिर भी हम अपनी हरकतों से उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे है। उनको नीचा दिखाने हर कोशिश कर रहे है। कभी सोच कर देखिएगा कि अगर उनकी जगह हमारा कोई अपना होता या कल को हमारा कोई अपना उस मुकाम पर पहुँचेगा क्या तब भी हम अपनी इसी तरह की हरकतों की वजह से उनका मनोबल तोड़ने के काम में लगे रहेंगे? शायद आपका जवाब नहीं होगा पर ध्यान रहे अगर हम आज नहीं सुधरे तो कल को हमे स्वयं इस तरह की स्थित का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि सोशल मीडिया पर हम नफरत के जो बीज बो रहे हैं उससे मोहब्बत की फसल की उम्मीद करना बेवकूफी है।

 

धन्यावाद

इस्लाहुद्दीन अंसारी



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