मामा में तो दो बार मॉं शब्द आता है. तुम कैसे इतने ज़ालिम हो गये शिवराज बाबू  ??

Posted on 09 Jun 2017 by Admin     
मामा में तो दो बार मॉं शब्द आता है. तुम कैसे इतने ज़ालिम हो गये शिवराज बाबू  ??
चैनराम की अभी 29 अप्रैल को शादी हुई थी, पत्नी के हाथों की मेंहदी तक नहीं सूखी थी, सिंदूर का रंग भी चटख लाल था, मंगलसूत्र में बसी विवाह की ख़ुश्बू तक मद्धम नहीं हुई थी !
चैनराम सेना में भर्ती होना चाहता था, सरहद की हिफ़ाज़त के लिये लडना चाहता था, तीन बार भर्ती में बैठ चुका था, ऑंख में कुछ कमी थी तो मेडिकल में छँट गया था, जिस सीने पर वो भारत की ओर आने वाली गोलियॉं झेलता, उसी सीने पर शिवराज की पुलिस की गोलियॉं लगीं और चैनराम मौत की नींद सो गया !
 
अभिषेक तो 12वीं का छात्र था, स्कूल जाता था, खेती किसानी करके परिवार का हाथ बँटाता था, अपनी ज़मीन पाने और फ़सल का वाजिब मूल्य पाने के लिये नारे लगा रहा था, शिवराज की पुलिस की गोलियों ने सीना छलनी कर दिया उसका भी !
 
पूनमचंद बबलू पाटीदार के पिता 2016 में गुज़र गये तो BSc की पढाई कर रहे बबलू को क़लम छोडकर कुदाल और फावडा उठाना पडा, अपनी फसल की लागत पाने के लिये ऑंदोलन कर रहे थे, और ज़ालिम हुक़ूमत ने जान ले ली बेचारे की !
 
सत्यनारायण दिहाडी मज़दूरी करके परिवार का पेट पालते थे, कन्हैयालाल किसानी करके अपने 16 साल और 11 साल के दो बच्चों के खाने पीने और पढाई के लिये पैसे जुटाते थे, बेरहमों की गोली ने जान ले ली दोनों की !
 
ये बातें सुनकर ज़ालिम फिरंगियों के दिन याद आ गये, ये ज़ुल्म एक एैसे मुख्यमंत्री की पुलिस ने किया जिसे पूरा मध्य प्रदेश प्यार से मामा कहता है !!
 
इमरान प्रतापगढ़ी


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