तमिल किसानों द्वारा मूत्र पीने की घटना 2017 की जगह 2013 में होती तब प्रतिक्रियाएं कुछ इस तरह होती।

Posted on 24 Apr 2017 by Admin     
तमिल किसानों द्वारा मूत्र पीने की घटना 2017 की जगह 2013 में होती तब प्रतिक्रियाएं कुछ इस तरह होती।

दिन शनिवार, तारीख़ 22 अप्रैल, साल 2013 स्थान दिल्ली का जंतर-मंतर।

सिर्फ साल में बदलाव किया है अब परिदृश्य देखिए।

तमिलनाडू के सूखापीड़ित किसान अपनी कर्ज माफी की माँग को लेकर अर्धनग्न अवस्था में पैदल चलकर तमिलनाडू से दिल्ली आते हैं जहाँ वो पिछले 38 दिनों से अपनी माँगों के लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन उसके बाद भी केंद्र की नकारा UPA सरकार की कान में जूँ तक नही रेंग रही है।

इन 38 दिनों में किसानों ने विरोध के दिल दहला देने वाले तरीके अपनाए हैं। और नौबत तो आज यहाँ तक पहुँच चुकी है कि उन्होंने मानवमूत्र का सेवन तक कर लिया मगर मनमोहन सिंह है कि इन किसानों की सुनने तैयार ही नहीं है उनके बारे में बात तक करने तैयार नहीं है। किसानों के प्रति सरकार की इस उदासीनता को लेकर सदन से लेकर सड़क तक विपक्ष ने जोरदार विरोध दर्ज कराया है। विपक्ष के भारी हंगामे को देखते हुए सदन की कार्रवाही दिनभर के स्थगित कर दी गई। विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने सुबह सुबह जंतर-मंतर पर पहुंचकर इन किसानों की पीड़ा सुनी जिसके बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने मनमोहन सरकार जमकर आड़े हाथों लिया और UPA सरकार की गलत नीतियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले में ट्वीट करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया है। मानवाधिकार कार्यकर्ता फलाने साहब ने मूत्र पीने की घटना की कड़ी निंदा करते हुए इस मामले को मानवाधिकार आयोग ले जाने की बात कही। योग गुरू बाबा रामदेव ने इन किसानों के समर्थन में जंतर-मंतर में बड़ा आंदोलन करने का ऐलान किया है उन्होंने इस मसले पर केंद्र सरकार को जमकर खरी खोटी सुनाई। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भी किसानों की इस दशा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मनमोहन सरकार को जमकर फटकार लगाई है। वो जल्द ही इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रपति महोदय को चिट्ठी लिखेंगे। दिल्ली के विभिन्न संगठनों से जुड़े हुए लोग भारी तादाद में जंतर-मंतर पर इक्ट्ठा हुए और इन किसानों को अपना समर्थन दिया।

किसानों के इस मुद्दे को लेकर रविवार को पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च निकालकर महामहिम महोदय से इस मामले में हस्तक्षेप करने की माँग करेगा। फिल्म जगत की जानी मानी हस्तियों ने भी अनुपम खेर के नेतृत्व में इस पूरे मामले को लेकर "मार्च फाॅर फार्मर्स" के नाम से एक विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री दिल्ली होते हुए भी इन किसानों से मिलने के लिए समय नहीं दे रहे हैं। सत्ता के नशे में चूर काँग्रेस के नेताओं को इन किसानों की पीड़ा नज़र नहीं आ रही है। देश विदेश के सारे न्यूज चैनल्स की नज़र इन किसानों पर है इनके विरोध के इस तरह के तरीकों का दुनियाँ को क्या संदेश जाएगा इसकी चिंता किसी को भी नहीं है।

देशभर में UPA सरकार की किसानों के प्रति इस उदासीनता को लेकर जबरदस्त आक्रोश है। देश भर में तमिलनाडू के इन किसानों के लिए धरना प्रदर्शन का दौर ज़ारी है। लोग किसान विरोधी UPA सरकार की इस हिटलरशाही रवैये के खिलाफ लामबंद हो रहे है। जब मनमोहन सरकार को देश के अन्नदाता की ही चिंता नहीं है तब आम आदमी लेकर ये सरकार कितनी संवेदनशील होगी इस पूरे मामले से अंदाज़ा लगाया जा सकता है। और सबसे बड़ी बात ये है कि इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी सरकार की कुंभकर्णीय नींद टूटने तैयार ही नहीं है। अभी तक इस मुद्दे को लेकर सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

By Islahuddin Ansari



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