कुछ इस तरह से इमरान प्रतापगढ़ी को प्यार करते हैं उनके फीमेल फैंस।

Posted on 11 Jan 2017 by Admin     
कुछ इस तरह से इमरान प्रतापगढ़ी को प्यार करते हैं उनके फीमेल फैंस।

ज़हन और दिल का मामला भी अजीब है, पर भर में छलांग लगा कर जाने कहां पहुंच जाता है, इक पल यहां अगले ही पल कई सदियों काफी सफर तय करके वहां पहुंच जाता है, जहां से बेशुमार यादगार लम्हे जुड़े हैं, कभी लगता है कि कुछ भी नहीं बदला सब कुछ वही है, वही हंसी, वही संजीदगी, वही सादगी, और वही दीवानापन, बादामी आंखें जिनका रगं कौन सा है आज तक समझ नही आया, कभी ये स्याह रात जैसी काली लगती हैं तो कभी शाम जैसी सुनहरी, कभी इनका रंग कत्थयी हो जाता है और वो रंग बन जाता है जिसका कोई नाम नहीं।

बाल वैसे ही घुंघराले जैसे बचपन में मेरे उस गुड्डे के होते थे जिससे मुझे अपनी गुड़िया की शादी करनी थी,  और वो काला चश्मा जो हमेशा से मेरा फेवरेट था, इरादा था मांग लूंगी या लड़ झगड़ कर ले लूंगी, लेकिन इरादा, इरादा ही रहा और वक्त पंख लगा कर उड़ गया, और तुम, तुम भी ज़मीन से फलक का सफर जाने कब तय कर गये। वो सफर जो महज़ इक सफर न था, जिसमें तुम्हारी बरसों की साधना, इबादत, मेहनत और खून पसीना शामिल है, वो रातो का जागना, अपनों से दूरी, बे आरामी, अपने लड़कपन के अनगिनत ख्वाबों की कुर्बानी और मुश्किलों के पुलसरात को पार करके तुम वहां पहुंचे जहां पहुंचना आसान तो हरगिज़ ना था!

बेशक हर गुजरते वक्त के साथ तुमने खुद को बदला, सजाया, संवारा, लफ्जों की धार से लेकर आवाज़ की रफ्तार को, पहले से कहीं पुरअसर बनाया।

और आज तुमको तुम कहने में भी तकल्लुफ होता है, कि तुम दुनिया के उन चुनिंदा लोगों में से हो जिसको अवाम ने दिलों और दुआओं में जगह दी है, जो दिलों में बसता है, ज़हनो में रहता है, डी पी पर सजता है, कांधो पर बिठाया जाता है। और एहतराम से जिसे बुलाया जाता है।

लेकिन मेरे लिए आज ही तुम वहीं हो, कोई याद फीकी नहीं पड़ी है, कोई मंज़र धुंधला नहीं हुआ है, रिश्ते कमजोर नहीं पड़े हैं, अकीदत कभी न डगमगाई है।

अल्लाह सादगी और सच्चाई के ये आईना जिसका नाम इमरान है, उसे कभी टूटने न देना।

लोग कहते हैं लगा रखी है खुशबू मैंने
उनकी यादों से महकती हूं कोई क्या जाने।

नोट : पोस्ट फिक्शन और फैक्ट्स को मिक्स करके
लिखी गई है। ये लिखने वाले की इमेजीनेशन है

Zeba Siddiqui की फेसबुक वाॅल से साभार



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