सुनो पापियों, तुम्हारी छाती पे शिव तांडव होगा, मंदिर ना बना तो तुम्हारा शव होगा।

Posted on 10 Apr 2017 by Admin     
सुनो पापियों, तुम्हारी छाती पे शिव तांडव होगा, मंदिर ना बना तो तुम्हारा शव होगा।
सुनो पापियों,
तुम्हारी छाती पे शिव तांडव होगा, 
मंदिर ना बना तो तुम्हारा शव होगा।
 
जब बाबरी मस्जिद तोड़ी गयी थी तब उस से कुछ महीनों पहले विश्व हिन्दू परिषद ने भारत भर में विभिन्न जगहों पर कैम्प लगा कर युवाओं को बाबरी मस्जिद को तोड़ने का प्रशिक्षण दिया था। जिस में युवाओं को सिखाया गया था की किस तरह किसी गोल गुंबद या मीनार पर चढ़ा जाए। किस तरह किसी सपाट दीवार पर रस्सियों के सहारे चढ़ा जाए और किस तरह फावड़े और कूदाल इत्यादि की सहायता से किसी इमारत को ढाया जाए। इस तरह से बाबरी मस्जिद तोड़ने से पहले विश्व हिन्दू परिषद ने अपनी तैय्यारियाँ सारी पूरी कर ली थी और उस समय की सत्तारूढ़ सरकार इस तरह के आयोजन, और प्रशिक्षण शिविर इत्यादि के बारे में अनजान बनी रही। और जिसका नतीजा यह हुआ की बाबरी मस्जिद शहीद कर दी गयी। यदि उस समय की सरकार इस तरह के मामलों का संज्ञान लेकर पहले से ही इस तरह के प्रशिक्षण शिविर को रोकती तो शायद बाबरी मस्जिद को शहीद होने से रोका जा सकता था। 
 
इसी कड़ी से मिलती जुलती एक ख़बर रामराज्य वाले हरियाणा के गुड़गाँव शहर से आ रही है। गुड़गाँव (पश्चिम) के एक बहुत बड़े मैदान में विश्व हिन्दू परिषद द्वारा "राम मंदिर निर्माण हेतु संकल्प सभा" का आयोजन किया गया है। वैसे तो यह एक आम सी बात लगती है लेकिन असल में यह मुद्दा बहुत ही गम्भीर है। हिन्दू युवाओं को इस तरह के आयोजन से उग्र और कट्टरपंथी बनाया जा रहा है। हिन्दू युवाओं को 'पापियों' के विरुद्ध हथियार उठाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस आयोजन में लाउड्स्पीकर पर अल्पसंख्यक समाज के ख़िलाफ़ ज़हर भरे गाने बजाए जा रहे हैं। इस तरह के आयोजन में "राम जी का मंदिर लहू से बनाएँगे" जैसे बोल वाले गानों का क्या अर्थ निकलता है ??? क्या यह बहुसंख्यक समाज को अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ भड़काना नहीं है ??? बॉलीवुड के गानों की धुन पर दूसरा गाना, "अयोध्या राम जन्मभूमि है, किसी के बाप का क्या जाता है" जैसे साम्प्रदायिक भावना भड़काने वाले गाने बजाए जा रहे हैं। वहाँ पर छोटे छोटे बच्चे, "हिंदुओं के ख़ून से, राम मंदिर का निर्माण होगा" जैसा नारा लगाते हुए दिखायी पड़ जाएँगे। "सुनो पापियों तुम्हारी छाती पे शिव तांडव होगा, राम मंदिर ना बना तो तुम्हारा वध होगा।" इस तरह के भावनाओं को भड़काने और देश को अराजकता और साम्प्रदायिकता की आग में एक बार फिर से झोंकने वाले नारे लगाए जा रहे हैं। 
उस मैदान में कई जगह पर बड़े-बड़े स्क्रीन लगाए गए हैं जिन पर धीमे संगीत के साथ बाबरी मस्जिद को तोड़ने की विडीओ चलायी जा रही है। आपको वहाँ पर हाथों में भगवा झंडा लिए बहुत से मोटर साइकल सवार युवा मिल जाएँगे जो इस आयोजन से जुड़ रहे हैं। एक बात साफ़ तौर पर बता दूँ की कोई आम सा आयोजन नहीं है। पुलिस की सुरक्षा के साथ विश्व हिन्दू परिषद का यह एक हिंसा फैलाने और समाज में नफ़रत को बढ़ावा देने वाला आयोजन है।
 
आपको याद होगा जब पिछले साल उत्तरप्रदेश के ग़ाज़ियाबाद में इसी तरह के आयोजनों में प्रशिक्षण शिविर लगाकर हिंदु युवाओं को आईएसआईएस जैसे आतंकवादी संगठनों से लड़ने के लिए प्रशिक्षण दिए जाने की ख़बर राष्ट्रीय मीडिया में सुर्ख़ियो में थी। विश्व हिन्दू परिषद और अन्य हिन्दुवादी संगठनों के इस तरह की तैयरियों से क्या मतलब निकाला जा सकता है ??? बाबरी मस्जिद और राम मंदिर विवाद जब न्यायालय में विचाराधीन है तो फिर विश्व हिन्दू परिषद द्वारा "राम मंदिर निर्माण हेतु संकल्प सभा" का आयोजन किए जाने का मक़सद क्या है ??? देश के युवाओं को रोज़गार मुहैया कराने की बजाय इस तरह के आयोजनों से क्यूँ जोड़ा रहा है ??? इस तरह के आयोजनों पर सरकार कोई संज्ञान लेकर करवाई क्यूँ नहीं करती है ??? या फिर हमारी सरकार इस प्रकार के आयोजनों के बारे में पूरी तरह से जान कर अनजान बनी रहती है ??? ऐसा तो नहीं की देश को जानबूझकर गृह युध की तरफ़ धकेला जा रहा है ???
 
विचार करने का विषय है की इस तरह के आयोजनों से क्या हासिल होगा ??? देश के आम नागरिकों के दिल में जो आज ज़हर भरा जा रहा है  उसका परिणाम क्या होगा ??? क्या राम मंदिर का निर्माण होने से हमारी सारी समस्याएँ ख़त्म हो जाएँगी ??? क्या राम मंदिर का निर्माण होने के बाद दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों पर होते आत्याचार पर लगाम लग जाएगी ??? क्या राम मंदिर बनने के उपरांत देश के अन्नदाता किसान आत्महत्या नहीं करेंगे ??? क्या इस देश में बेरोज़गारी, आशिक्षा, भुखमरी से भी ज़्यादा अहमियत राम मंदिर की है। पता नहीं हमारा देश कब इतना शिक्षित और विचारशील होगा जब इस तरह के आयोजनकर्ताओं से पूछेगा की हमारे लिए बेरोज़गारी, आशिक्षा, भुखमरी बड़ी समस्या है। पहले इस से निपट लें, तो बाद में हम आपके ऐसे आयोजनों में भाग लेंगे।
 
By Mohammad Khalid Hussain. 


Like us on Facebook