अमेरिका ने फिर से क्यों बनाया अफगानिस्तान को निशाना?

Posted on 14 Apr 2017 by Admin     
अमेरिका ने फिर से क्यों बनाया अफगानिस्तान को निशाना?
शक्ति का खेल यही है कि  पूंजीपति देश पहले आप को  हिंसक बनाता है फ़िर हथियार मुफ़्त देता है फिर हथियार बेचता है
फिर जब आप शांति बहाली की कोशिश कर रहे होते हैं तो आप के ऊपर बम गिरा देता है।
ठीक यही कहानी है अमेरिका और अफगानिस्तान की,
पहले अमेरिका ने अफगानिस्तान को तालिबान और अलकायदा दिया,
फिर जब वह इस्लाम के नाम पर हिंसा बरतने लगे तो उन्हें मुफ़्त में  हथियार दिए,
फिर उन्हें हथियार बेचे,सब कुछ हो गया अब शांति बहाली का सिलसिला शुरू किया गया तो अमेरिका ने हिरोशिमा की तारीख अफगानिस्तान में दोहरा दी,
 
*मदर्स ऑफ ऑल बम्बस*
 
अमेरिका द्वारा तकरीबन एक टन वजनी बम अफगानिस्तान में गिराए जाने के कई कारण हैं
 
1) अन्य राष्ट्रपतियों की तरह ट्रम्प का भी खुद को ऐतिहासिक व्यक्ति के रूप में पेश करने का सपना 
 
2) अफगानिस्तान को रूस से दूर रखने की कोशिश
 
3) रूस के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन (जबकि रूस के पास भी "फादर ऑफ बम्बस" है)
 
4) भारत को यह संदेश देना कि अगर अमेरिका कश्मीर मामले में मध्यस्थता बनने की पहल कर रहा है तो इनकार नहीं करना है, अन्यथा यही हश्र होगा,
5) मीडिया और समाचार चैनलों को फिर याद दिलाना कि बगदादी अभी भी जिंदा है,
(6) और सबसे बढ़ा कारण आलम ए  इस्लाम और मुसलमानों को फिर से बर्बरता का निशाना बनाने की हुंकार सुनाना।
(07) दुनिया को  फिर से अपनी चौधराहट स्वीकार करने के लिये प्रेरित करना,
आतंकवाद के नाम पर फिर से मुसलमानों  को निशाना बनाना।
(08) फिर से एक विश्व युद्ध का बिगुल बजाना, दो विश्व शक्तियों का टकराव,
नतीजतन हमेशा की तरह किसी मुस्लिम देश का नष्ट होना।
 
(09) तुर्की को यह संदेश देना कि इस्लामवाद और आत्मविश्वास छोड़कर विश्व नीतियों के अनुसार चलो,
  
लाखों की आबादी वाले क्षेत्र में बम गिराए जाने के बाद निश्चित रूप से हजारों लोग मारे गए होंगे,
 लेकिन मीडिया इसे नहीं दिखाए गा, और संयुक्त राष्ट्र निंदा करके पूरी दुनिया को खामोश कर देगा.
या एक वैश्विक साजिश है जिसमें उन  सभी देशों को खींचने की कोशिश है जो खुद कुछ कर गुज़रने की हिम्मत जुटा रहे हैं,
 
इसलिए भारत सहित सभी एशियाई व ख़लीजी 
देशों को चाहिए कि वो पूंजीवादी देशों से दूरी बनाएं और तुर्की की तरह अपने पैरों पर खड़े होकर तरक्की करें, अन्यथा वह दिन दूर नहीं कि अमेरिका या कोई दूसरा पूंजीपति देश दुनिया के किसी भी क्षेत्र को आतंकवाद से प्रभावित बतलाकर उसे श्मशान बना देगा।
 
 
मेहदी हसन एैनी द्वारा आलेख 


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