अम्बेडकरवादी होने का ढोंग करते राजनेता। और लगातार शोषित होता दलित और मुस्लिम समुदाय।

Posted on 16 Apr 2017 by Admin     
अम्बेडकरवादी होने का ढोंग करते राजनेता।  और लगातार शोषित होता दलित और मुस्लिम समुदाय।

14 अप्रैल बीत गया दलितो के मसीहा बाबा साहेब अम्बेडकर की 126वीं जयंती उनके जन्म स्थान महू से लेकर नागपुर और हिंदुस्तान के हर छोटे बड़े शहर मे पूरे धूम धाम से मनायी गयी। सोशल मीडिया से लेकर अखबारों और न्यूज़ चैनलों तक, बसपा से लेकर कांग्रेस और भाजपा तक स्कूल काॅलेज से लेकर विश्व विद्यालयों तक हर जगह बाबा साहेब छाए रहे। किसी ने बाबा साहेब के आदर्शो की बात कही तो किसी ने अपने आपको प्रधानमंत्री बनने की वजह बाबा साहेब के आदर्शो को बताया। यानी जिससे जैसा बन सका उसने बाबा साहेब के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। और सही भी है जात-पात ऊंच-नीच और छुआ-छूत जैसी कुरीतियों के खिलाफ़ लड़ते हुए अपनी जिंदगी बिताने वाले इस सामाजिक योद्धा का जितना भी सम्मान किया जाए कम हैं।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल आज भी जस का तस बना हुआ है। क्या हमने बाबा साहेब की शिक्षाओं को उनके आदर्शों को उनकी कल्पनाओं को सही मायनो मे समाजिक जीवन मे अपनाने का प्रयास गंभीरता से किया है? दलित बच्चों को जिंदा जला दिया जाता है, दलित दुल्हे की सर पर हैलमेट पहनी फोटो पूरी दुनिया मे वायरल हो जाती है। रोहित वेमुला इस ऊंच-नीच की लड़ाई लड़ते लड़ते बाबा साहेब के आदर्शो पर चलते इस सिस्टम का शिकार होकर फांसी के फंदे पर झूल जाता है। JNU का एक छात्र रहस्यमयी परिस्थतियों में गायब हो जाता है। गाय के नाम पर सरेआम दलितों की चमड़ी उधेड़ दी जाती है। अख़लाक अहमद और पहलू खान को उन्मादी भीड़ बाबा साहेब के बनाए हुए संविधान को खुली चुनौती देती हुई मौत के घाट उतार देती है। और कुछ फर्जी अंबेडकरवादी चीख चीख कर बाबा साहेब अमर रहे चिल्लाते रह जाते हैं। जिन बुराईयों से बाबा साहेब जिंदगी भर लड़ते रहे वो बुराईयाँ आज भी जस की तस समाज में व्याप्त हैं। दलित समाज की स्थिति आज भी उतनी अच्छी नही हो पा रही जितनी अच्छी होनी चाहिये थी। बाबा साहेब के नाम पर वोट बटोरने वाली पार्टियाँ दलित नेताओ को आज भी वो स्थान नही दे पाती जिनके वो हक़दार हैं।

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार के मुताबिक दलित नेता सत्ता मे सिर्फ समाजिक न्याय मंत्रालय तक ही सीमित रह जाते हैं जबकि अगर बाबा साहेब के आदर्शों को ईमानदारी से अपनाया जाता तो इस मंत्रालय का कोई अस्तित्व ही नही बचना चाहिए था। हमें अभी बाबा साहेब की शिक्षाओं और विचारों पर बहोत काम करने की आवश्यकता है। जातीय बंधन से मुक्ति पाकर बाबा साहेब के "We Are Indian firstly, and lastly" वाले सिद्धांत पर काम करने की आवश्यकता है क्योंकि बिना इन समाजिक बुराईयों और कुरीतियों को दूर करे डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और कैशलेस इंडिया के सारे दावे बेईमानी से लगते हैं।

युनिवर्सिटी के कैम्पसो मे छात्र आंदोलन करने मजबूर है। सरकार की गलत नीतियाँ शिक्षा व्यवस्था पर बुरा असर डाल रही हैं। हमे इन सबसे ऊपर उठकर देशहित में हर दिन बाबा साहेब के सिद्धांतो को लेकर चलना होगा। नीले हरे और केसरिया रंग की बीच की खाई को बाबा साहेब सिद्धांतो से पाटना होगा तब कही जाकर #IncredibleIndia का सपना पूरी तरह से साकार हो सकता है। बाबा साहेब किसी एक समाज या एक पार्टी के नही बल्कि पूरे देश के हैं हर पूरे देश को मिलकर संविधान के इस जनक के विचारो को आगे बढ़ाना होगा तब कहीं जाकर हम बाबा साहेब के शिक्षाओं का सही उपयोग कर सकते हैं। अन्यथा हर साल 14 अप्रैल एक राजनीतिक आयोजन मात्र बनकर रह जायेगा।

जय हिंद जय भारत

By Islahuddin Ansari



Like us on Facebook