इमरान ने खुद ही अपना आज लिखा है और इमरान खुद ही अपना कल लिखेंगे।

Posted on 30 Apr 2017 by Admin     
इमरान ने खुद ही अपना आज लिखा है और इमरान खुद ही अपना कल लिखेंगे।

इमरान प्रतापगढ़ी शायद आप सबने इनका नाम सुना होगा! हिन्दुस्तान के सबसे दिलवाले शायर, जिसे कद्र है अपने चाहने वालों की, जिसकी जिंदगी का एक ही मक़सद है हमेशा अन्याय के खिलाफ खड़े होना, सच के लिईये लड़ना। लेकिन कुछ साहबों की नज़रों में ये सिर्फ मज़हबी शायर है आतंक को बढ़ावा देने वाले हैं, कुछ लोग तो ये भी कहते हैं की इमरान कश्मीर वाली नज़्म आतंकियों को प्रोत्साहन देने वाली नज़्म है।

तो आपने क्यों नहीं गाया कश्मीर का दर्द???

आपको क्यों नहीं दिखा फिलस्तिन का दर्द???

क्यों नहीं दिखी आपको अख़लाक की प्यारी सी बेटी साजिदा???

क्यों नहीं खड़े हुए आप नज़ीब की अम्मी के साथ???

आपके पास कहां है इतना समय किसी मज़लूम के दर्द को पढ़ने की, आपको तो बड़े दरबारों के चक्कर काटने से फुर्सत ही नहीं।

नहीं साहब मैं एक हिन्दु परिवार में जन्म लेने वाला सच्चा हिन्दूस्तानी कहता हूँ इमरान एक ही है और एक ही रहेगा। इमरान को कुदरत ने वो हश्शास कलेजा दे रखा है की वो चीख चीख कर अन्याय की आंखों में अपनी पथराई आंखें डालकर उसका विरोध करेगा। हर एक मज़लूम की आवाज है इमरान, हर एक हिंदुस्तानी के दिल में धड़कता है इमरान, शोहरतों के पीछे इमरान नहीं भागता बल्कि शोहरतें इमरान के पीछे भागती हैं। इमरान की शोहरत ना तो किसी अख़बार की मोहताज है और ना ही किसी अवार्ड की। इमरान ने खुद ही अपना आज लिखा है और खुद ही अपना कल लिखेगा।

आप कहते हैं कि इमरान की नज़्मों को कभी किताबों में नहीं लिखा जाएगा, इमरान की नज़्मों को कभी अदब में जगह नहीं मिलेगी, तो क्या हुआ इमरान जीते जी इंकलाब पैदा कर जाएगा उसकी नज्में सदीयों तक गुनगुनाई जाएंगी, जब-जब अन्याय की भृकुटी चढ़ेगी, अन्याय की छाती 56" की होगी तब-तब उन्हें आईना दिखाने के लिए इमरान की नज़्मों का सहारा लिया जाएगा। खैर छोड़िए, इमरान के लिए जितना लिखा जाए वो कम है, और मेरी कलम की इतनी औकात भी नहीं कि इमरान की शख्सियत बयां कर सके।।

पुनित विश्वास....!!



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