भीड़ कब जाने किसको कहाँ मार दे मुल्क़ में आज ठेंगे पे कानून है.....!!

Posted on 30 May 2017 by Admin     
भीड़ कब जाने किसको कहाँ मार दे मुल्क़ में आज ठेंगे पे कानून है.....!!
मत पूँछ के सब्र की इंतेहा कहाँ तक है 
तू सितम करले तेरी ताक़त जहाँ तक है
 
ये किसकी नज़र लग गई हिंदुस्तान के अम्नो-चैन को, भाईचारे और खुशहाली को, इतनी नफ़रत कहाँ से आ गयी दिलों मे?
किसकी शह पर ये भीड़ इतनी हिंसक होती जा रही है? सिर्फ अफ़वाहों पर इस तरह पीट पीट कर मार देना. सर पर नमाज़ की टोपी ना हुई कोई कफ़न हो गया. मौत तो जैसे अब हर चौराहे पर इंतज़ार में है की यहाँ से कोई बेगुनाह मासूम गुज़रे और मैं दबोच लूँ।
 
ये कैसा विकास है?? ये कौनसा भारत है??
 
आपकी नफ़रतों का जो मज़मून है,
इसमें सियाही नही खून ही खून है।
भीड़ कब जाने किसको कहाँ मार दे,
मुल्क़  में आज ठेंगे पे क़ानून  है.....
 
एक विशेष रंग का गमछे पहने कुछ गुंडे, राष्ट्रवादी पर्टी के कथित पालतू अब यही पुलिस हैं यही वकील और यही जज. झूठी अफ़वाह फैलाकर ये किसी को भी धर लेंगे और बीच चौराहे पर उसका फैसला कर देंगे. ये राम राज के लेबल लगाकर डर और दहशत फैला रहे है. कानून व्यवस्था को इतना कमज़ोर और इतना बेबस शायद ही पहले देखा गया हो.
 
मेरा सवाल उस मुट्ठी भर भीड़ से नही है जो हिंसक है. मेरा सवाल उस भीड़ से है जो इस क़त्लेआम पर चुप्पी ओढ़े बैठी है. जो भीड़ कल तक निर्भया को इंसाफ दिलाने के लिए पुलिस की लाठियों का सामना करने तैयार थी, जो कल तक भ्रष्टाचार के खिलाफ जंतर मंतर पर उमड़ आती थी. आज उस भीड़ को विचलित करने वाली खून से तर-बतर तस्वीरें देख कर गुस्सा क्यों नहीं आता??? क्यों नहीं खौलता उसका खून अख़लाक मिनहाज़ रोहित पहलू और नजीब पर।
 
मेरा सवाल कमज़ोर विपक्ष से भी है की अख़िर कब वो अपना नर्म रवैया बदलेगी. मज़बूत विपक्ष लोकतंत्र की असली ताक़त है. अब वक्त आ गया है की इस बदहाल कनून व्यवस्था पर सत्ता पक्ष को घेरा जाए, दबाव बनाया जाए ताकि इस चिंताजनक हालात में सुधार की गुंजाइश बाकि रहे. 
 
मेरा सवाल प्रधनमंत्री जी से भी है. अच्छी बात है आपको मैनचेस्टर मे हुए आतंकी हमले पर बहुत दुःख होता है.. पर खून मे डूबे इंसान, रहम की भीख़ मांगते बेबस इंसान, तड़प तड़प कर दम तोड़ते मज़लूमों पर दुख़ क्यों नही होता? क्या ये आपके देश के नागरिक नहीं है? क्या इनके प्रति अपकी कोई ज़िम्मेदारी नही? कोई जवाबदेही नही?     
 
आप भारत को Cashless Economy बनाना चाहते है पर अगर यही हाल रहा। इसी तरह उन्मादी झुंड इंसानियत को सरेआम क़त्ल करती रही तो आपका और हम सबका भारत Cashless Economy बने ना बने पर Humanityless Society मे ज़रूर तब्दील हो जाएगा. जो शायद एक बदनुमा दाग़ होगा हम सबके माथे पर।
 
By: नाज़िया फातिमा


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